राजस्थान में प्रेमी संग मिलकर पत्नी ने की पति की हत्या, प्रेम-प्रसंग के चलते उठाया खौफनाक कदम
राजस्थान में प्रेमी संग मिलकर पत्नी ने की पति की हत्या, प्रेम-प्रसंग के चलते उठाया खौफनाक कदम25 मई की रात तीनों आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से नरसीराम की हत्या की. हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फांसी पर लटकाकर तुरंत दफन कर दिया गया

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राजस्थान के जालोर जिले के सांचौर में प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवाद के चलते हुई हत्या के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा किया है. मृतक नरसीराम की हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसे फांसी के फंदे पर लटकाकर शव को दफनाया गया था. घटना की सूचना मृतक के भाई द्वारा दिए जाने के दस दिन बाद पुलिस ने गहन जांच करते हुए हत्या के रहस्य से पर्दा उठाया.

प्रेमी, पत्नी और देवर ने मिलकर की थी हत्या ।

परिवादी दुदाराम पुत्र लालाराम जाति मेघवाल निवासी बागोड़ा ने बागोड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसके भाई नरसीराम की हत्या गांव के ही सावलाराम और नरसीराम की पत्नी माफीदेवी ने मिलकर की है. रिपोर्ट में बताया गया कि माफीदेवी और सावलाराम के बीच अवैध संबंध थे. सावलाराम ने नरसीराम के सिर पर वार कर उसे फांसी पर लटकाया. मृतक की पत्नी ने शुरुआत में इस बारे में कुछ नहीं बताया, लेकिन समाजजनों द्वारा पूछताछ के बाद माफीदेवी ने सच्चाई उजागर की.

दफनाए गए शव को 10 दिन बाद निकाला गया
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ज्ञानचन्द यादव ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया. जिला कलेक्टर के आदेशानुसार, उपखंड मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में नरसीराम का दफनाया गया शव बाहर निकाल कर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया. इससे हत्या की पुष्टि हुई.

जांच में सामने आया चौंकाने वाला मोड़
जांच में सामने आया कि घटना से दो दिन पहले 23 मई को मृतक नरसीराम और उसके भाई दुदाराम में डूंगराराम के लड़कियों की सगाई के कार्यक्रम के दौरान झगड़ा हुआ था. इसके बाद घर पर भी विवाद बढ़ा. मृतक नरसीराम व उसकी पत्नी द्वारा दुदाराम की पत्नी केलीदेवी के रणजीतसिंह के साथ अवैध संबंध की बात समाज में उजागर करने के डर से केलीदेवी, रणजीतसिंह और दुदाराम ने नरसीराम को रास्ते से हटाने की योजना बनाई.

योजनाबद्ध तरीके से की गई हत्या
25 मई की रात तीनों आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से नरसीराम की हत्या की. आरोपी केलीदेवी ने माफीदेवी का मुंह दबाकर उसे चुप कराया, वहीं रणजीतसिंह ने नरसीराम का मुंह कपड़े से दबाया ताकि वह शोर न कर सके. इसके बाद दुदाराम ने कुल्हाड़ी और रणजीतसिंह ने लाठी से मारकर उसकी हत्या कर दी. हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फांसी पर लटकाकर तुरंत दफन कर दिया गया, और पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई.।

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