बुलेट ट्रेन परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 456 किलोमीटर तक पिलर निर्माण पूरा

मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर तेजी से चल रहा काम, आठ स्टेशनों का सिविल निर्माण पूरा
नई दिल्ली। देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आकार ले रही है। सितंबर 2026 तक परियोजना के तहत 456 किलोमीटर हिस्से में पिलर निर्माण और 371 किलोमीटर में वायडक्ट का निर्माण पूरा कर लिया गया है। वहीं, 299 किलोमीटर लंबे हिस्से में छह लाख ध्वनि अवरोधक लगाए जा चुके हैं। परियोजना के तहत सुरंग, पुल, रेल ट्रैक, विद्युतीकरण और स्टेशनों के निर्माण कार्य भी प्रगति पर हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस मार्ग पर 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। परियोजना के अंतर्गत आठ स्टेशनों पर सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वहां वास्तुशिल्पीय सज्जा और फिनिशिंग का काम जारी है। गुजरात और महाराष्ट्र में स्थित तीन रेल डिपो का निर्माण भी चल रहा है। इनमें गुजरात के साबरमती और सूरत तथा महाराष्ट्र का ठाणे डिपो शामिल हैं।
भूमिगत सुरंग और समुद्र के नीचे से गुजरेगी ट्रेन
परियोजना का शुरुआती 21 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत बनाया जा रहा है। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे से गुजरने वाली सात किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल है। यह देश की पहली समुद्र के नीचे से गुजरने वाली रेल सुरंग होगी। पहाड़ी क्षेत्रों में चार सुरंगों की खुदाई पूरी की जा चुकी है। वहीं, 21 किलोमीटर लंबी सुरंग के एक हिस्से में नई ऑस्ट्रियन टनलिंग पद्धति (एनएटीएम) से पांच किलोमीटर तक खुदाई की गई है।
भूमिगत हिस्से के बाद रेल मार्ग शिलफाटा के निकट बाहर निकलेगा और गुजरात की ओर अधिकांश दूरी ऊंचे पुलों यानी वायडक्ट पर तय करेगा। इस कॉरिडोर में 25 नदियों और जलधाराओं को पार करने की व्यवस्था की गई है।
बीकेसी स्टेशन जमीन के नीचे बनेगा
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में बुलेट ट्रेन स्टेशन जमीन के लगभग 10 मंजिल नीचे बनाया जा रहा है। इसके प्लेटफॉर्म जमीन से करीब 24 मीटर नीचे होंगे। यहां 16 डिब्बों वाली बुलेट ट्रेन के संचालन के लिए छह प्लेटफॉर्म प्रस्तावित हैं।
गुजरात में सूरत स्टेशन को हीरा उद्योग की पहचान के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। यहां मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और राजमार्गों से संपर्क की सुविधा को भी ध्यान में रखा गया है। वडोदरा स्टेशन को मौजूदा रेलवे स्टेशन के पास बनाया जा रहा है, जिससे यात्रियों को दूसरी रेल सेवाओं से जुड़ने में सुविधा मिलेगी।
साबरमती में बुलेट ट्रेन, उपनगरीय रेल, मेट्रो और बस सेवाओं को एकीकृत करने के लिए बहु-माध्यम परिवहन केंद्र विकसित किया जा रहा है। साबरमती नदी पर पुल का निर्माण भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विद्युतीकरण और ट्रैक बिछाने का काम जारी
परियोजना के तहत 206 किलोमीटर वायडक्ट पर 9,300 ओवरहेड विद्युतीकरण खंभे लगाए जा चुके हैं। रेल मार्ग पर ध्वनि के प्रभाव को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर ध्वनि अवरोधक लगाए जा रहे हैं। वायडक्ट पर गिट्टी रहित स्लैब ट्रैक बिछाने की योजना है, जिससे हाईस्पीड रेल परिचालन के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक देश में 7,000 किलोमीटर लंबा हाईस्पीड रेल नेटवर्क विकसित करने के लक्ष्य के बीच मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने पर देश में तेज गति वाली रेल परिवहन व्यवस्था के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।