बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को मिली रफ्तार, दिल्ली-लखनऊ से नैनीताल का सफर होगा 1.5 घंटे तक कम
: दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से नैनीताल व कुमाऊं की यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) करीब 100 किलोमीटर लंबे चार लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण की तैयारी में जुट गया है। परियोजना के लिए सर्वे और रूट डिमार्केशन का कार्य शुरू हो चुका है। अब यह सोशल मीडिया में चर्चा तेज हो गई है ।
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बरेली से हल्द्वानी तक बनाया जाएगा। यह पूरी तरह कंट्रोल्ड एक्सेस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा, यानी मौजूदा हाईवे को चौड़ा करने के बजाय नए रूट पर विकसित किया जाएगा। इससे हाई-स्पीड यात्रा संभव होगी और स्थानीय ट्रैफिक का हस्तक्षेप न्यूनतम रहेगा।
वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर से हल्द्वानी और नैनीताल जाने वाले यात्रियों को मुरादाबाद-रुद्रपुर मार्ग से गुजरना पड़ता है, जहां पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान लंबे जाम लगते हैं। नया एक्सप्रेसवे इस समस्या का बड़ा समाधान साबित हो सकता है।
1 से 1.5 घंटे कम होगा सफर
एक्सप्रेसवे रुद्रपुर, किच्छा, लालकुआं, पंतनगर और बहेड़ी जैसे भीड़भाड़ वाले शहरों को बाईपास करेगा। इससे यात्रा का समय करीब 1 से 1.5 घंटे तक कम होने की संभावना है। साथ ही ईंधन की बचत, सड़क दुर्घटनाओं में कमी और अधिक सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा।
लखनऊ और मध्य यूपी को भी मिलेगा फायदा
इस परियोजना का लाभ केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इसे शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है, जिससे लखनऊ और मध्य उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए भी नैनीताल और कुमाऊं की यात्रा पहले से अधिक आसान और तेज हो जाएगी।
पर्यटन और कारोबार को मिलेगी नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने से उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। कम समय में पहुंचने की सुविधा मिलने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
FASTag वार्षिक पास की भी मिल सकती है सुविधा
चूंकि परियोजना NHAI के तहत विकसित की जा रही है, इसलिए भविष्य में यहां FASTag वार्षिक टोल पास की सुविधा भी लागू की जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, वार्षिक पास लेने वाले निजी वाहन चालकों के लिए प्रति एकतरफा यात्रा की औसत लागत करीब 15 रुपये तक रह सकती है, जिससे नियमित यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
यदि परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो दिल्ली, लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड की यात्रा पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी। साथ ही कुमाऊं क्षेत्र के पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
