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अप्रैल 2026 का पहला आधा हिस्सा उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से कम तापमान के साथ काफी आरामदायक रहा। इस दौरान उत्तर और पूर्वी भारत में अच्छी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां भी देखने को मिलीं। लेकिन अब मौसम पूरी तरह शुष्क हो गया है और देश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी तेजी से बढ़ने लगी है। महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और दिल्ली के कुछ हिस्सों में लू जैसी स्थितियां बन गई हैं।
मौजूदा गर्मी सामान्य मौसमी बदलाव का हिस्सा नहीं है, बल्कि ‘हीट डोम’ नामक मौसमीय घटना के कारण बढ़ रही है। बांदा, प्रयागराज, अकोला, अमरावती और वर्धा जैसे शहरों में तापमान 45°C के पार पहुंच चुका है। आमतौर पर इतनी तेज गर्मी की शुरुआत ओडिशा और गुजरात के आंतरिक हिस्सों से होती है, लेकिन इस बार पैटर्न अलग है, जिसकी मुख्य वजह हीट डोम प्रभाव है।

क्या होता है हीट डोम और कैसे करता है असर

हीट डोम एक ऐसी स्थिति होती है जब वायुमंडल में उच्च दबाव का क्षेत्र गर्म हवा को एक ढक्कन की तरह नीचे दबाकर रोक लेता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है, जिससे गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती। इसे “ओमेगा ब्लॉक” भी कहा जाता है। इस दौरान न तो बादल बनते हैं और न ही हवा का ऊर्ध्वाधर प्रवाह हो पाता है, जिससे गर्मी लगातार बढ़ती रहती है।

एंटी-साइक्लोन की भूमिका और बढ़ता तापमान

वायुमंडल के मध्य स्तर में एक एंटी-साइक्लोन (उच्च दबाव क्षेत्र) बन गया है, जो हवा को घड़ी की दिशा में घुमाता है और ऊपर उठने वाली हवा को रोक देता है। यह सिस्टम आंतरिक महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और उत्तर आंतरिक कर्नाटक के हिस्सों में पिछले लगभग एक हफ्ते से बना हुआ है। यह 10,000 से 20,000 फीट की ऊंचाई के बीच सक्रिय है और इसी कारण मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिसका असर उत्तर और दक्षिण के हिस्सों तक फैल रहा है।

सामान्य लू और हीट डोम में अंतर

हीट डोम से होने वाली गर्मी सामान्य लू से अलग होती है। सामान्य लू कुछ दिनों के लिए कई कारणों से बनती है और बाद में गरज-चमक या बारिश से खत्म हो जाती है। लेकिन हीट डोम में गर्म हवा ऊपर नहीं उठ पाती, जिससे लंबे समय तक भीषण गर्मी बनी रहती है। इसके कारण सूखा, अत्यधिक तापमान और जंगलों में आग जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं
मौजूदा गर्मी सामान्य मौसमी बदलाव का हिस्सा नहीं है, बल्कि ‘हीट डोम’ नामक मौसमीय घटना के कारण बढ़ रही है। बांदा, प्रयागराज, अकोला, अमरावती और वर्धा जैसे शहरों में तापमान 45°C के पार पहुंच चुका है। आमतौर पर इतनी तेज गर्मी की शुरुआत ओडिशा और गुजरात के आंतरिक हिस्सों से होती है, लेकिन इस बार पैटर्न अलग है, जिसकी मुख्य वजह हीट डोम प्रभाव है।

क्या होता है हीट डोम और कैसे करता है असर

हीट डोम एक ऐसी स्थिति होती है जब वायुमंडल में उच्च दबाव का क्षेत्र गर्म हवा को एक ढक्कन की तरह नीचे दबाकर रोक लेता है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है, जिससे गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती। इसे “ओमेगा ब्लॉक” भी कहा जाता है। इस दौरान न तो बादल बनते हैं और न ही हवा का ऊर्ध्वाधर प्रवाह हो पाता है, जिससे गर्मी लगातार बढ़ती रहती है।

एंटी-साइक्लोन की भूमिका और बढ़ता तापमान

वायुमंडल के मध्य स्तर में एक एंटी-साइक्लोन (उच्च दबाव क्षेत्र) बन गया है, जो हवा को घड़ी की दिशा में घुमाता है और ऊपर उठने वाली हवा को रोक देता है। यह सिस्टम आंतरिक महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और उत्तर आंतरिक कर्नाटक के हिस्सों में पिछले लगभग एक हफ्ते से बना हुआ है। यह 10,000 से 20,000 फीट की ऊंचाई के बीच सक्रिय है और इसी कारण मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिसका असर उत्तर और दक्षिण के हिस्सों तक फैल रहा है।

हीट डोम से होने वाली गर्मी सामान्य लू से अलग होती है। सामान्य लू कुछ दिनों के लिए कई कारणों से बनती है और बाद में गरज-चमक या बारिश से खत्म हो जाती है। लेकिन हीट डोम में गर्म हवा ऊपर नहीं उठ पाती, जिससे लंबे समय तक भीषण गर्मी बनी रहती है। इसके कारण सूखा, अत्यधिक तापमान और जंगलों में आग जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं

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By admin

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