देहरादून। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला को समय पर सहायता, कानूनी सलाह और न्याय दिलाना आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बुधवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों के संरक्षण, जनजागरूकता और आयोग की कार्यप्रणाली को मजबूत करने को लेकर चर्चा की।
बैठक में आगामी वर्ष के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिए गए। कंडवाल ने कहा कि सरकार और प्रशासन के समन्वय से आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार कार्य कर रहा है। आयोग की कार्यप्रणाली के प्रति महिलाओं का विश्वास बढ़ा है। यही वजह है कि प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय, ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों से भी महिलाएं अपनी शिकायतें और प्रार्थना पत्र लेकर आयोग पहुंच रही हैं।
उन्होंने बताया कि बढ़ते कार्यभार और महिलाओं की अपेक्षाओं को देखते हुए बोर्ड बैठक में आयोग में 10 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके साथ ही आयोग के सदस्यों के मानदेय तथा सफाई कर्मचारियों के वेतन में उचित वृद्धि का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया।
कंडवाल ने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में आयोग की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए उपाध्यक्षों को जिला स्तर की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संबंधित सदस्य अपने-अपने जिलों में नियमित जनसुनवाई, महिला जागरूकता कार्यक्रम, वन स्टॉप सेंटरों का निरीक्षण और महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण से जुड़े कार्य करेंगे।
