आशीष की जमानत शर्तों में ढील नहीं
नई दिल्ली, : उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत की शर्तों में और ढील देने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने आशीष मिश्रा की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी जमानत की शर्तों में और राहत देने तथा पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अपने पैतृक स्थान पर जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। मिश्रा के वकील ने अदालत से कहा कि मौजूदा प्रतिबंधों के कारण वह अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘फिलहाल इस अनुरोध पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। आवेदन खारिज किया जाता है।’
सुनवाई के दौरान पीड़ित किसान पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुकदमे की सुनवाई के तरीके पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि कार्यवाही जल्दबाजी में चलाए जाने के कारण प्रत्यक्षदर्शियों सहित कई महत्वपूर्ण गवाहों को गवाहों की सूची से हटा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘समस्या यह है कि मुकदमे की सुनवाई जिस तरीके से हो रही है। कई महत्वपूर्ण गवाहों को केवल इसलिए छोड़ दिया गया, क्योंकि कार्यवाही बहुत तेजी और जल्दबाजी में चल रही है। उन्हें अगले ही दिन पेश होने के लिए बुलाया जाता है और यदि वे अगले दिन उपस्थित नहीं हो पाते, तो उन्हें गवाहों की सूची से हटा दिया जाता है।’ भूषण ने कहा कि वह इन चिंताओं को सामने रखते हुए एक आवेदन
मिश्रा ने शीर्ष कोर्ट से अपने पैतृक स्थान पर जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था
दायर करना चाहते हैं। इस पर सीजेआई ने कहा कि ऐसी शिकायतें पहले अधीनस्थ अदालत के समक्ष उठाई जानी चाहिए। पीठ ने कहा, ‘ऐसे आवेदन पर सबसे पहले हम क्यों विचार करें? आपको पहले अधीनस्थ अदालत के समक्ष जाना चाहिए और बताना चाहिए कि ये कौन-से गवाह हैं, जो इस मामले के लिए महत्वपूर्ण हैं।’ भूषण ने यह भी कहा कि कुछ दस्तावेजों का अनुवाद किया जा रहा है। उन्होंने एक अलग मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें एक व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया गया है। आशीष मिश्रा के वकील ने इस बात पर आपत्ति जताई कि उस व्यक्ति को मिश्रा का समर्थक बताया जा रहा है। भूषण ने कहा कि जिस गवाह को कथित तौर पर धमकाया गया था, उसे बाद में गवाहों की सूची से हटा दिया गया।
