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12 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 1.47 करोड़ की ठगी, STF ने 50 लाख के लाभार्थी खाताधारक को हरियाणा से दबोचा

देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर टीम ने प्रदेश के चर्चित 1.47 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 50 लाख रुपये के लाभार्थी खाताधारक और वांछित वारंटी को हरियाणा के अंबाला से गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी था। इस मामले में पहले ही तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अगस्त 2025 में नैनीताल निवासी एवं रूहेलखंड विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त कुलपति ने साइबर थाना रुद्रपुर में शिकायत दर्ज कराई थी। साइबर ठगों ने खुद को महाराष्ट्र साइबर क्राइम का अधिकारी बताकर पीड़िता को झांसे में लिया और उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए 60 करोड़ रुपये के लेन-देन का झूठा आरोप लगाया।

इसके बाद आरोपियों ने बैंक खातों के ऑनलाइन सत्यापन का बहाना बनाकर पीड़िता को लगातार 12 दिनों तक व्हाट्सएप कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा। इस दौरान डर और दबाव बनाकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।

जांच के दौरान एसटीएफ को पता चला कि गिरफ्तार आरोपी के बैंक खाते में साइबर ठगी की 50 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर हुई थी। तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और लगातार निगरानी के आधार पर एसटीएफ की साइबर टीम ने आरोपी को हरियाणा के अंबाला जिले के शाह थाना क्षेत्र स्थित पिलखनी गांव से गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी

भूपिंदर सिंह (41 वर्ष) पुत्र गुरचरण सिंह, निवासी ग्राम पिलखनी, रविदास मंदिर के पास, थाना शाह, जनपद अंबाला, हरियाणा।

एसटीएफ ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और मामले में अन्य आरोपियों की तलाश भी की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो या व्हाट्सएप कॉल पर डराया-धमकाया जाए तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें।

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