आसाराम को अपनी पसंद का देखभालकर्ता रखने की अनुमति
नई दिल्ली,
उच्चतम न्यायालय ने एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के 2013 के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू बाबा आसाराम को फिलहाल अंतरिम जमानत देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया लेकिन उसे चौबीसों घंटे सहायता के लिए अपनी पसंद का प्रशिक्षित देखभालकर्ता (केयरटेकर) रखने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने स्वास्थ्य आधार पर अंतरिम जमानत का अनुरोध करने वाली आसाराम की याचिका को लंबित रखा। पीठ ने उसे यह छूट दी कि स्वास्थ्य बिगड़ने पर वह मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध कर सकता है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आसाराम ने न्यायालय से यह तथ्य छिपाया कि उसके वकील ने पैरोल के लिए आवेदन किया था। आसाराम
के वकील ने कहा कि पैरोल के लिए आवेदन काफी पहले किया गया था और वह स्वास्थ्य आधार पर नहीं था।
इससे पहले, राजस्थान उच्च न्यायालय ने आसाराम को 20 दिन की पैरोल देते हुए कहा था कि राज्य सरकार उसके पैरोल आवेदन को खारिज करने के अपने फैसले को उचित नहीं ठहरा सकी। उच्च न्यायालय ने जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद 85 वर्षीय आसाराम को यह राहत जेल में बिताई गई अवधि और पहले अंतरिम रिहाई के दौरान उसके आचरण को ध्यान में रखते हुए दी थी।
