हल्द्वानी-: तीन शिक्षा संगठनों ने मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा 1500 शिक्षकों के वेतन अवरुद्ध किए जाने के बयान पर तीखा रोष जाहिर करते हुए कड़ी चेतावनी दी है संगठन ने कहा कि इस तरह की बयान बाजी कर अखबार में बयान देना गलत है।
तीनों संगठनों में रोष व्याप्त करते हुए कहा कि 22 जुलाई को विभिन्न समाचार पत्रों में मुख्य शिक्षा द्वारा यह समाचार छापा गया कि विद्या समीक्षा केंद्र पर जिन शिक्षकों के द्वारा अपनी तथा छात्रों की उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है उन सभी का वेतन रोक दिया जाएगा जिस संबंध में शिक्षक के तीनों संगठनों राजकीय संगठन, प्राथमिक संगठन,जूनियर हाई स्कूल संगठन की पदाधिकारी के द्वारा घोर आपत्ति दर्ज की है उनका कहना है कि यदि विभाग हमें यह उपस्थिति दर्ज कराने हेतु उपकरण कनेक्टिविटी सिम उपलब्ध कराती है तो शिक्षक रोजाना इस ऑनलाइन कार्य को करेगा नहीं तो नहीं करेगा क्योंकि आज तक जो भी कार्य शिक्षक ऑनलाइन कर रहा था वह उसकी निजी संपत्ति थी मुख्य शिक्षा अधिकारी के द्वारा उस निजी संपत्ति को सरकारी संपत्ति बनाने का की कोशिश की गई है जो शिक्षक संगठनों को मंजूर नहीं है शिक्षक संगठनों ने एक स्वर में कहा है कि जब तक मुख्य शिक्षा अधिकारी के द्वारा वेतन रोकने के आदेश को वापस नहीं लिया जाता तब तक उनके द्वारा मुख्य शिक्षा अधिकारी के साथ कोई वार्ता नहीं की जाएगी जहां एक और पंचायत चुनाव में 9 जुलाई से 31 जुलाई तक सभी शिक्षक और कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में लगे हुए हैं वहीं पर मुख्य शिक्षा अधिकारी के द्वारा वेतन रोकने संबंधी आदेश से शिक्षकों के मनोबल को गिराया है शिक्षक संगठनों ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को पत्र देकर कहा है कि यदि उनके द्वारा यह आदेश वापस नहीं लिया गया तो अगस्त माह के प्रथम सप्ताह आपके विरुद्ध मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया जाएगा यदि जरूरत पड़ी तो आमरण अनशन भी किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के अध्यक्ष मनोज तिवारी प्राथमिक शिक्षा संगठन गिरीश जोशी राजकीय शिक्षा संगठन देवेंद्र कुमार जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संगठन महामंत्री बंशीधर कांडपाल महामंत्री पंकज बढ़ानी महामंत्री डी न भट्ट के द्वारा इस बयान पर रोज जताया गया ।

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