मासिक धर्म स्वच्छता पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन
डा. सीमा मधवार और डा. दीपा तोमर ने साझा किए स्वास्थ्य के मूल मंत्र
पंतनगर । विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठात्री डा. अल्का गोयल के निर्देशन एवं सह-प्राध्यापक डा. छाया शुक्ला के संयोजन में क्रियान्वित ‘हेडिंग टॉर्च ऑफ प्लेनेट अर्थ टू स्कूल एंड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स ऑफ उत्तराखंड’ नामक आई.सी.एस.एस.आर. परियोजना के अंतर्गत सात-दिवसीय मासिक धर्म स्वच्छता एवं स्वास्थ्य विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशालाएं दून एकेडमी जवाहर नगर, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नगला, राजकीय इंटर कॉलेज शांतिपुरी-2 और सैम मानेकशॉ ग्लोबल स्कूल शांतिपुरी में आयोजित की गईं।
कार्यशाला में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. सीमा मधवार ने बालिकाओं को मासिक धर्म चक्र, हार्माेनल परिवर्तन, पोषण, यूटीआई संक्रमण, सफेद पानी, पीसीओडी जैसी समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माहवारी का नियमित चक्र एक स्वस्थ शरीर का संकेत है और यदि इसमें कोई गड़बड़ी या अधिक दर्द होता है तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने 26 उपयोगी सुझाव साझा किए जो माहवारी के दौरान अपनाए जा सकते हैं, जैसे गर्म सेंक, व्यायाम, पौष्टिक आहार, योग, लैवेंडर तेल से मालिश आदि।
कार्यक्रम में आयुर्वेदाचार्य डा. दीपा तोमर ने आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से मासिक धर्म संतुलन के उपाय बताए। उन्होंने लौह तत्व, फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, और ओमेगा-3 युक्त आहार जैसे हरी सब्जियां, चुकंदर, अनार, दही, गुड़ आदि के सेवन की सलाह दी। साथ ही अशोक, शतावरी, त्रिफला, हल्दी और तुलसी जैसे औषधीय पौधों के नियमित उपयोग से होने वाले लाभों की भी जानकारी दी। योगासनों (भ्रामरी, अनुलोम-विलोम, पश्चिमोत्तानासन) और पर्याप्त नींद की भूमिका पर भी बल दिया गया।
इस अवसर पर परियोजना संयोजिका डा. छाया शुक्ला ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बालिकाओं को अपने शरीर के प्राकृतिक चक्र को सम्मानपूर्वक स्वीकार करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देना भी है। कार्यशाला में छात्राओं ने खुलकर अपने सवाल पूछे और व्यावहारिक व वैज्ञानिक उत्तर प्राप्त किए। कार्यशाला का संचालन पी.डी.एफ. डा. पूनम द्वारा किया गया।
प्रत्येक विद्यालय में औषधीय बाल वाटिका की शुरुआत भी की गई ताकि छात्राओं में प्रकृति के प्रति लगाव बढ़े। कार्यशाला में कुल 190 छात्राओं ने भाग लिया और वृक्षारोपण कार्यक्रम में 48 औषधीय पौधों का रोपण किया गया, जिसमें 60 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।

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