उत्तराखंड में नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई स्थानों पर बढ़त का रुझान; फिलहाल सभी नदियां खतरे के निशान से नीचे
देहरादून, 20 जुलाई। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) द्वारा केंद्रीय जल आयोग के हिमालयी गंगा मंडल से प्राप्त जानकारी के आधार पर सोमवार सुबह 10:00 बजे दैनिक जलस्तर एवं बाढ़ पूर्वानुमान जारी किया गया। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की अधिकांश प्रमुख नदियों में जलस्तर बढ़ने का रुझान दर्ज किया गया है, हालांकि सभी नदियां अभी भी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, गंगा, पिंडर और काली नदी के कई जलमापन स्थलों पर जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं उत्तरकाशी, बद्रीनाथ और मरोरा (नयार) में जलस्तर स्थिर बना हुआ है।
सबसे अधिक वर्षा मंदाकिनी घाटी (88 मिमी) और कर्णप्रयाग क्षेत्र (86.8 मिमी) में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा रुद्रप्रयाग में 69.4 मिमी, श्रीनगर में 45.8 मिमी और धारचूला में 77.2 मिमी वर्षा दर्ज हुई।
प्रमुख जलस्तर की स्थिति
भागीरथी (उत्तरकाशी): 1119.90 मीटर, स्थिर
देवप्रयाग: जलस्तर बढ़ रहा है
रुद्रप्रयाग (अलकनंदा): 625.00 मीटर, बढ़त
श्रीनगर: 533.60 मीटर, बढ़त
ऋषिकेश: 338.22 मीटर, बढ़त
हरिद्वार: 291.18 मीटर, बढ़त
धारचूला (काली नदी): 888.90 मीटर, बढ़त
बैराजों और बांधों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भीमगोड़ा बैराज (हरिद्वार) से 28,625 क्यूसेक, वीरभद्र बैराज (ऋषिकेश) से 58,410.51 क्यूसेक तथा डाकपत्थर बैराज (यमुना) से 10,375 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने जिला प्रशासनों को नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल किसी भी नदी के खतरे के निशान को पार करने की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार हो रही बारिश को देखते हुए लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की गई है।
