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कबूतरों को दाना डाला तो दर्ज होगी एफआईआर

/नई दिल्ली

मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ताओं से हाई कोर्ट जाने को कहा है। इतना ही नहीं जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ भीड़ द्वारा दादर कबूतरखाना को जबरदस्ती खोलने और कबूतरों को दाना डालने की घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा है कि जो लोग भी, इस तरह कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं, इन्हें गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इस न्यायालय द्वारा समानांतर हस्तक्षेप उचित नहीं है। याचिकाकर्ता आदेश में संशोधन के लिए हाई कोर्ट जा सकता है।” पीठ ने हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कबूतरों को दाना डालना गंभीर स्वास्थ्य संबंधी खतरा पैदा करता है। शीर्ष अदालत ने बृहन्मुंबई नगर निगम को निर्देश दिया कि वह उन लोगों के खिलाफ आपराधिक

मुम्बई में भीड़ द्वारा कबूतरखाने को जबरदस्ती खोलने और दाना डालने की घटना पर गुस्से में सुप्रीम कोर्ट

मामला दर्ज करे जो निगम के निर्देशों का उल्लंघन कर मुंबई के ‘कबूतरखानों’ में कबूतरों को दाना डालना जारी रखे हुए हैं।

हाई कोर्ट ने पिछले महीने पशु प्रेमियों और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा दायर कई याचिकाओं को खारिज कर दिया था और कहा था कि दादर, चर्चगेट से लेकर विभिन्न स्थानों पर, चौराहों पर बने कबूतरखानों पर कबूतरों को दाना डालना सार्वजनिक रूप से परेशानी उत्पन्न करने वाला कृत्य है और इससे लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरा है। अदालत ने साथ ही मुंबई नगर निगम को ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

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