
यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में लागू होगी स्थानांतरण नीति; गृह जिले और लंबे समय से तैनात अधिकारियों को हटाया जाएगा
नई दिल्ली (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों की स्थानांतरण और पदस्थापना को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्धारित स्थानांतरण नीति का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
निर्देशों के अनुसार, चुनावी कार्यों से जुड़े ऐसे अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में किसी जिले में तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है या निर्धारित समय सीमा तक पूरा करने वाले हैं। गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड के लिए यह समय सीमा 31 मार्च, जबकि उत्तर प्रदेश के लिए 31 मई निर्धारित की गई है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिले में पदोन्नति के बाद की गई सेवा को भी तीन साल के कार्यकाल की गणना में शामिल किया जाएगा। हालांकि, पिछले चार वर्षों के दौरान राज्य मुख्यालय में दी गई सेवाओं को इस गणना से बाहर रखा जाएगा। स्थानांतरित अधिकारियों को राज्य मुख्यालय में तैनात किया जा सकता है, भले ही वह उसी राजस्व जिले में स्थित हो।
चुनाव के दौरान तैनाती वाले क्षेत्रों में दोबारा नियुक्ति नहीं
निर्वाचन आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी तथा पुलिस निरीक्षक, उपनिरीक्षक और उनसे ऊपर के पदों पर तैनात अधिकारियों को उस विधानसभा क्षेत्र या जिले में दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा, जहां वे पिछले विधानसभा चुनाव या उसके बाद हुए उपचुनाव के दौरान तैनात थे।
प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर भी लागू होंगे नियम
ये निर्देश केवल चुनावी कार्यों के लिए विशेष रूप से नियुक्त अधिकारियों तक सीमित नहीं हैं। इनके दायरे में अपर जिला मजिस्ट्रेट, उप जिला मजिस्ट्रेट, डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा मंडलायुक्त, नगर आयुक्त तथा नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में तैनात संबंधित अधिकारियों पर भी नियम लागू होंगे।
पुलिस विभाग में जिले की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बलों की तैनाती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी इन निर्देशों के तहत रखा गया है। इनमें पुलिस महानिरीक्षक, उपमहानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, उपमंडलीय पुलिस प्रमुख, निरीक्षक और रिजर्व निरीक्षक सहित समकक्ष अधिकारी शामिल हैं। हालांकि, कंप्यूटरीकरण, विशेष शाखा और प्रशिक्षण जैसे तकनीकी अथवा आंतरिक विभागों में तैनात पुलिस अधिकारियों को इन निर्देशों से छूट दी गई है।
आयोग ने राज्य सरकारों को निर्देशों के अनुरूप अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण करने तथा जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी की नियुक्ति से संबंधित निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इन कदमों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखना और निर्वाचन व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।