पिथौरागढ़। न्यायालय विशेष सत्र न्यायाधीश (पोक्सो) धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने रिश्ते में अपनी ही नाबालिग भांजी, जो उसके स्कूल की छात्रा भी थी, को अगवा कर दुष्कर्म करने वाले दोषी प्रधानाचार्य को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर कुल एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
30 जनवरी 2025 को देहरादून विकासनगर निवासी आरोपी 37 वर्षीय राजेश राणा जो कि धारचूला क्षेत्र के एक स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात था। पीड़िता जो रिश्ते में उसकी चचेरी बहन की बेटी, यानि की भांजी लगती थी। घटना के दिन पीड़िता स्कूल ड्रेस में घर से निकली, जिसे रास्ते में आरोपी ने बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया इसके बाद वह उसे देहरादून विकासनगर ले गया। वहां भी उसने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाएं। धारचूला पुलिस ने 11 मार्च 2025 को हिमाचल प्रदेश के शिमला के एक मकान से पीड़िता को बरामद किया। जिसके बाद 14 मार्च 2025 को आरोपी प्रधानाचार्य को जेल भेजा गया। पैरवी प्रमोद पन्त डी जी सी फौजदारी व प्रेम भण्डारी ए डी जी सी फौजदारी ने की।
अदालत में बयान दर्ज कराते हुए पीड़ित छात्रा ने बताया कि 30 जनवरी 2025 की घटना से पहले भी जब वह घर पर अकेली होती थी, तब भी उसके मामा ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए थे। विरोध करने पर उसने पीड़िता और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। दोषी राजेश राणा के दो बच्चे है। उसकी बड़ी बेटी, पीड़िता की ही उम्र के बराबर की है।
