भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारें, रामलीला से मिलती है सत्य और मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा: सुरेंद्र सिंह लोटनी

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लालकुआं। राजीव नगर बिंदुखत्ता प्रथम में आयोजित रामलीला के तृतीय दिवस का शुभारंभ मंगलवार को नगर पंचायत लालकुआं के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह लोटनी ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे लोटनी ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं से उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कारों और आदर्श जीवन मूल्यों को समझने का सशक्त माध्यम है।

राम भक्तों को संबोधित करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह लोटनी ने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्शों की अनुपम मिसाल है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और संयम बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का पालन किया। पिता के वचन का सम्मान करते हुए राजमहल के सुखों का त्याग कर वनवास स्वीकार करना उनके त्याग और आज्ञाकारिता का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, सत्य और धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने आचरण से यह सिद्ध किया कि एक आदर्श पुत्र, भाई, पति, मित्र और राजा के रूप में मनुष्य को किस प्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने समाज में प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत करने पर भी जोर दिया। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों से परिचित होने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलता है।

लोटनी ने कहा कि वर्तमान समय में भगवान श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सेवा और मर्यादा को अपनाए, तो परिवार से लेकर समाज तक सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे रामलीला में मंचित होने वाले प्रसंगों को केवल देखें ही नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाली सीख को अपने दैनिक जीवन में भी आत्मसात करें।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें यह संदेश देता है कि अंततः विजय सत्य, न्याय और धर्म की ही होती है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर ही एक संस्कारवान, समरस और आदर्श समाज का निर्माण किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में धार्मिक उत्साह देखने को मिला और क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।

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