पत्नी की हत्या के दोषी रोशन लाल की उम्रकैद बरकरार
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पत्नी की गला घोंटकर हत्या के मामले में 2018 में अपर जिला सत्र न्यायधीश ऋषिकेश की अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए रोशन लाल की आपराधिक जेल अपील खारिज करते हुए उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की श्रृंखला पूर्ण और अटूट है जो सीधे तौर पर आरोपी की ओर ही संकेत करती है। मामले के अनुसारए ऋषिकेश के चंद्रेश्वर नगर निवासी रूपा अपने पति रोशन लाल और बेटी के साथ किराये के मकान में रहती थी। मृतका के भाई दीपक सरकार ने 1 नवंबर 2017 को दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया था कि रोशन लाल अकसर रूपा के चरित्र पर संदेह करता था और उसके साथ मारपीट करता था। आरोप था कि 31 अकटूबर और 1 नवंबर 2017 की रात उसने तार से गला घोंटकर अपनी पत्नी की हत्या कर दी।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि मृतका
ने आत्महत्या की थी तथा अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि कथित हत्या में प्रयुक्त तार को फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गयाए जिससे अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ती है वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आरोपी और मृतका के बीच लगातार विवाद होते थे। मकान मालिक और पड़ोसियों ने भी दोनों के बीच झगड़ों की पुष्टि की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन पर गला घोंटने के स्पष्ट निशानए संघर्ष के चिन्ह तथा श्वासावरोध से मृत्यु की पुष्टि हुई है जिससे आत्महत्या की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाती है। खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि चिकित्सीय साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि रूपा की मृत्यु गला घोंटे जाने से हुई थी। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य परिस्थितियों में स्वयं गला घोंटकर आत्महत्या करना संभव नहीं होता। न्यायालय ने यह भी माना कि मृतका और आरोपी घटना के समय एक ही कमरे में रह रहे थे और पत्नी की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई इसका संतोषजनक उत्तर देने में आरोपी असफल रहा।


