बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे से बदलेगी कुमाऊं की तस्वीर, दिल्ली-NCR से नैनीताल की यात्रा होगी और आसान
हल्द्वानी/बरेली। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क को नई रफ्तार देने वाली महत्वाकांक्षी बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग 100 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के लिए अंतिम लोकेशन सर्वे पूरा हो चुका है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेज दी गई है।
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चार लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से दिल्ली-NCR, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और कुमाऊं मंडल के बीच यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होने की उम्मीद है। परियोजना को क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए गेम चेंजर माना जा रहा है।
पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
वर्तमान में दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और अन्य शहरों से नैनीताल, रानीखेत, अल्मोड़ा तथा कुमाऊं के अन्य पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को मुरादाबाद-रुद्रपुर मार्ग का सहारा लेना पड़ता है। पर्यटन सीजन और अवकाश के दौरान इस मार्ग पर लंबा जाम आम बात है।
नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे पर्यटक कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
नए रूट पर बनेगा एक्सप्रेसवे
बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड मॉडल पर विकसित किया जाएगा, यानी इसके लिए नया मार्ग तैयार किया जाएगा। इससे मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा और यात्रियों को बेहतर सड़क सुविधा मिल सकेगी।
एक्सेस-कंट्रोल्ड होने के कारण इस मार्ग पर प्रवेश और निकास बिंदु सीमित रहेंगे, जिससे वाहनों की औसत गति बढ़ेगी और सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी।
इन क्षेत्रों को जोड़ेगा एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित योजना के अनुसार एक्सप्रेसवे बरेली, फरीदपुर, आंवला, बहेड़ी, किच्छा, लालकुआं और हल्द्वानी को जोड़ेगा। यह कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी को उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से सीधे संपर्क में लाएगा।
भविष्य में इसे अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं, जिससे पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
उद्योग और व्यापार को भी होगा फायदा
एक्सप्रेसवे बनने से पंतनगर, किच्छा और लालकुआं जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी। माल ढुलाई में लगने वाला समय और लागत कम होगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। उत्तराखंड के कृषि, बागवानी और औद्योगिक उत्पादों को दिल्ली-NCR सहित बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा।
क्षेत्रीय विकास की नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का नया आधार बनेगा। इसके निर्माण से पर्यटन, व्यापार, उद्योग, रोजगार और रियल एस्टेट क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होंगी।
यदि परियोजना को समयबद्ध तरीके से मंजूरी और निर्माण कार्य मिलता है, तो आने वाले वर्षों में कुमाऊं क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास को अभूतपूर्व गति मिल सकती है।
