भडाभुडिया गाँव में जनजातीय महिलाओं को मिला स्वरोजगार का मंत्र
पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय की पहल से खुला आत्मनिर्भरता का मार्ग
खटीमा, 28 अगस्त।
खटीमा ब्लॉक के भडाभुडिया गाँव में जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम पहल की गई। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कृषि संचार विभाग द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने गाँव की महिलाओं को मूल्य संवर्धन तकनीकों से परिचित कराया और स्वरोजगार की नई राह दिखाई।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य मनोज सिंह राना, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती सुरेंदरी देवी, कृषि संचार विभाग पंतनगर की सहायक प्राध्यापिका एवं परियोजना अन्वेषक डॉ. अर्पिता शर्मा कांडपाल तथा डॉ. नरेश कुमार मौजूद रहे।
मनोज सिंह राना ने कहा कि “मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण से महिलाएं परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। ऐसे प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
डॉ. नरेश कुमार ने इस पहल को सराहते हुए कहा कि “स्वरोजगार से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और गाँव का समग्र विकास संभव होगा।”
डॉ. अर्पिता शर्मा कांडपाल ने बताया कि “मंडुआ व अन्य स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर महिलाएं अपनी आय कई गुना बढ़ा सकती हैं।”
श्रीमती सुरेंदरी देवी ने कहा कि “स्वरोजगार महिलाओं के लिए सबसे बड़ा हथियार है। इससे न केवल आर्थिक लाभ होता है बल्कि आत्मसम्मान भी बढ़ता है।”
प्रशिक्षण में महिलाओं को मंडुआ बिस्कुट, लापसी, नमकीन और केक बनाने की विधियाँ सिखाई गईं। साथ ही विपणन, पैकेजिंग और आयवृद्धि की रणनीतियों पर भी जानकारी दी गई। खास बात यह रही कि प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागी महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने हेतु प्लास्टिक टब, कंटेनर, मंडुआ आटा, मैदा, चीनी, खोया, रिफाइंड तेल, नमक, गुड़ और सूजी जैसे कच्चे माल व उपकरण वितरित किए गए।
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने इसे जीवन-परिवर्तनकारी अनुभव बताते हुए कहा कि इस पहल से उन्हें न केवल आर्थिक मजबूती मिलेगी बल्कि आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
