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(बड़ी खबर)नर्मदा नदी में दूध चढ़ाने पर एनजीटी सख्त ।।


नर्मदा में दूध चढ़ाने पर एनजीटी ने जवाब मांगा

भोपाल, : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में एक धार्मिक आयोजन के दौरान नर्मदा नदी में 11 हजार लीटर दूध और 210 साड़ियां अर्पित किए जाने से जल प्रदूषण होने के आरोप संबंधी याचिका पर केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से जवाब मांगा है।

सीहोर जिले के भेरूंदा क्षेत्र के सतदेव गांव में 21 दिवसीय धार्मिक आयोजन के समापन पर आठ अप्रैल को अनुष्ठान के तहत करीब 11 हजार लीटर दूध नदी में प्रवाहित किया गया था। पर्यावरणविदों ने पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।

भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्र

पर्यावरणविदों ने इस धार्मिक आयोजन से पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी

पीठ ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई की। न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) को यह बताने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने का

निर्देश दिया कि क्या ऐसे अनुष्ठान मौजूदा पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों के दायरे में आते हैं या उनके लिए नए नियमों की जरूरत है।

उन्होंने दावा किया कि इस अनुष्ठान से नदी की पारिस्थितिकी, जलीय जीवों, सिंचाई स्रोतों और पेयजल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है तथा यह जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों का उल्लंघन है। अधिकरण ने कहा कि नदी में दूध प्रवाहित करने से होने वाले प्रदूषण के संबंध में उसके समक्ष कोई वैज्ञानिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया है। लेकिन उसने यह भी कहा कि जल अधिनियम की धारा 24 के तहत जलधाराओं और

कुओं में प्रदूषणकारी पदार्थों को डालने पर रोक है। पीठ ने कहा कि कार्बनिक पदार्थों से जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) बढ़ सकती है, जिससे जलीय जीवन प्रभावित हो सकता है। अधिकरण ने यह भी कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान नर्मदा में दूध प्रवाहित किया जाना पर्यावरण और जनचिंता का विषय बन गया है, जिसकी प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों द्वारा जांच आवश्यक है। मामले में अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी। नर्मदा नदी का उद्गम मध्यप्रदेश के अमरकंटक से होता है और यह 1,312 किलोमीटर की यात्रा करते हुए महाराष्ट्र एवं गुजरात से होकर खंभात की खाड़ी के जरिए अरब सागर में मिलती है।

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