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उम्र बनी नहीं बाधा— 80 वर्षीय भागीरथी देवी ने पुनर्जीवित किया उजड़ा वन क्षेत्र; उजड़े मानर जंगल को किया पुनर्जीवित”


चम्पावत

“उम्र बनी नहीं बाधा— 80 वर्षीय भागीरथी देवी ने पुनर्जीवित किया उजड़ा वन क्षेत्र; उजड़े मानर जंगल को किया पुनर्जीवित”

“अटूट संकल्प और श्रम से बदली जंगल की तस्वीर, 80 वर्षीय भागीरथी देवी को जिलाधिकारी ने किया सम्मानित”

जनपद चम्पावत के दूरस्थ एवं प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र ग्राम मानर मल्ला (खेतीखान) की 80 वर्षीय श्रीमती भागीरथी देवी ने अपने अदम्य साहस, अथक परिश्रम और पर्यावरण के प्रति गहरे समर्पण से एक ऐसी मिसाल प्रस्तुत की है, जो न केवल जनपद बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

उनके इस अतुलनीय योगदान को सम्मानित करते हुए जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा उनके कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

एक समय ऐसा था जब मानर क्षेत्र का जंगल धीरे-धीरे उजड़ता जा रहा था। अवैध कटान, उपेक्षा और प्राकृतिक कारणों के चलते हरियाली समाप्ति की ओर थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, बिना किसी सहायता के, भागीरथी देवी ने अकेले ही इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने न केवल पौधरोपण का कार्य प्रारंभ किया, बल्कि उसे जीवन का उद्देश्य बना लिया।

वर्षों तक निरंतर परिश्रम करते हुए उन्होंने सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों पौधों का रोपण किया और उनकी देखरेख की। वह प्रतिदिन जंगल जाकर पौधों को पानी देना, उनकी सुरक्षा करना, जानवरों से बचाव करना और उन्हें विकसित होते देखना—इन सभी कार्यों को अपने नियमित जीवन का हिस्सा बनाए रहीं। उनकी यह साधना किसी तपस्या से कम नहीं रही।

कठोर सर्दी, तेज धूप, वर्षा और शारीरिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका जोश और प्रतिबद्धता युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज मानर का वही क्षेत्र पुनः सघन हरित वन में परिवर्तित हो चुका है, जहां अब विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, पक्षी और वन्यजीवों की उपस्थिति देखी जा सकती है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार ने कहा कि भागीरथी देवी का जीवन और उनका कार्य इस बात का प्रमाण है कि यदि व्यक्ति के भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भाव हो, तो वह अकेले भी बड़े से बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि भागीरथी देवी का योगदान न केवल पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक चेतना और जनभागीदारी का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।

जिलाधिकारी ने आगे कहा कि उनके द्वारा रोपे गए वृक्ष आने वाले वर्षों में क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करेंगे, भू-क्षरण को रोकेंगे, जल स्रोतों को पुनर्जीवित करेंगे तथा स्वच्छ वायु प्रदान कर जनस्वास्थ्य को भी बेहतर बनाएंगे। यह कार्य सतत विकास और प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल है।

उन्होंने जनपदवासियों, विशेषकर युवाओं से आह्वान किया कि वे भागीरथी देवी से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर उसकी देखभाल सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर विभिन्न जिला स्तरीय अधिकारीगण, विभिन्न क्षेत्रों के लोग आदि मौजूद रहे।

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